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बजट में मोदी सरकार ने बेरोजगारों को दिया झुनझुना

बेरोजगारों को दिया झुनझुना- रोजगारहीन विकास व निजीकरण को बढावा देता बजट

विश्व की पांचवी बडी अर्थव्यवस्था का वर्ष 2020 – 2021 का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रेरक इंडिया, सबका आर्थिक विकास तथा मानवीय व करूण समाज का निर्माण इसके तीन  आयाम हैं। इस दशक का पहला तथा मोदी-2 का यह बजट ऐसे समय आया है जबकि अर्थव्यवस्था मे लगातार गिरावट दिखाई दे रही है। बेरोजगारी की दर 45 वर्ष मे सर्वोच्च स्तर पर है तथा महंगाई चरम पर है। वैसे वर्ष भर नीतिगत बदलाव के दौर मे वार्षिक बजट की महत्ता भी कम हुई है तथा यह रस्म अदायगी जैसा हो गया है।
20 लाख किसानो को सौर पम्प मे मदद,  जैविक खाद को बढावा, किसानो को 15 लाख करोड के ऋण, कृषि क्षेत्र के लिए 2.83 करोड का आवंटन,स्वयम सहायता समूह के माध्यम से ग्रामीण भंडारण योजनाए दूध मांस  मछली के लिए किसान रेल तथा कृषि उडान योजना की शुरूआत की चर्चा करते हुए वर्ष 2022 तक किसानो की आय दोगुना बढाने की बात कही गई है। कृषि लागत को घटानेए उपज के वाजिब दाम सुनिश्चित करने  तथा आयातण्निर्यात को कृषि हितैषी बनाए बगैर कृषि संकट को दूर करने की कोई ठोस दिशा बजट मे दिखाई नही देती है।

स्वास्थ्य के लिए रू 69000 करोड तथा शिक्षा के लिए 99300 करोड के आवंटन से ही सिद्ध हो गया है कि इन क्षेत्रो के लिए जीडीपी के न्यूनतम आवश्यक 3 प्रतिशत व 6 प्रतिशत से काफी कम आवंटित किया गया हैण् शिक्षा व स्वास्थ्य के नैगमिकरण मे इस राशि का भी अधिकतर निजी क्षेत्र को फंडिंग के लिए ही उपयोग होता दिखाई दे रहा है। पीपीपी माडल पर जिला अस्पताल से सम्बद्ध मेडिकल कालेज के प्रावधान से सरकारी संसाधनो का उपयोग कर महंगी चिकित्सा शिक्षा से आखिर किसको लाभ होगा। इसी तरह बीमा व स्वास्थ्य के गठजोड से भी बडी कम्पनिया ही लाभांवित हो रही है, अलबत्ता प्रत्येक जिले मे जन औषधि केंद्र सस्ती दवा के लिए तथा सेहत व शिक्षा के लिए ब्रिज कोर्स एक अच्छा प्रस्ताव है।

27000 किमी  की नई रेल लाइनए 6000 किमी हाइवे, 100 नये हवाई अड्डे अधोसंरचना विकास मे सहायक होंगे तथा 150 उच्च शिक्षा केंद्रो मे उधमिता की डिग्री से कुशल उधमी तैय्यार करने मे मदद मिलेगी।

क्या क्या मिला बजट में आपको, पूरा बजट एक नजर में

सामाजिक वैश्विक सूचकांक, भूख सूचकांक, विषमता सूचकांक मे देश की खराब स्थिति, बेरोजगारी की स्थिति, किसानो की आत्महत्या, बेरोजगार युवाओ की समस्या व आत्महत्याओ को बजट भाषण मे कोई जगह नही प्राप्त नही हुई है। पोषणाहार के लिए 35600 करोड, अनुसूचित जातियोपिछडो के लिए 85000 करोड, अनुसूचित जनजातियो के लिए 53700 करोड तथा बुजुर्गो के लिए 9500 करोड के आवंटन का सही उपयोग होगा तथा सामाजिक सूचकांको मे हमारी स्थिति बेहतर होगीए ऐसी आशा की जा सकती है।

बैंकिंग मे जमाकर्ताओ का पैसा सुरक्षित है, वित्त मंत्री का यह बयान सार्वजनिक क्षेत्र की बैंको के प्रति विश्वास को बढाता है लेकिन क्या ऐसा विश्वास निजी बैंको को लेकर किया जा सकता है।  बैंक जमाकर्ताओ की जमा राशि की ग्यारंटी की सीमा एक लाख से बढा कर पांच लाख की गई है यह एक अच्छी पहल हैं 1978 से यह सीमा एक लाख ही है तथा मुद्रा अवमूल्यन को देखते हुए इसे 10 लाख तक तो करना ही चाहिए, साथ ही निजी बैंको की सम्पूर्ण बचत राशि के भुगतान की ग्यारंटी पर विचार करना चहिए।

कार्पोरेट टेक्स को पहले ही 30रू से 22रू किया जा चुका हैं अब निर्माण व पावर क्षेत्र की कम्पनियो को 15रू टेक्स का प्रावधान किया गया है।
पीपीपी माडल के बारम्बार उल्लेख से निजीकरण के रास्ते पर तेजी से चलने के संकेत ही मिलते हैए कुल मिलाकर निजीकरण व रोजगारहीन विकास, बेरोजगारों को दिया झुनझुना   ही देगा यह बजट।

 

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